नमस्ते निवेशक, शेयर बाजार में फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis) के अंतर्गत ROE एक महत्वपूर्ण पार्ट होता है। जिसे किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले अवश्य चेक किया जाता है।
इस लेख में, फंडामेंटल एनालिसिस – शेयर बाजार में ROE के अर्थ, इसकी कार्यप्रणाली और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
तो चलिए समझते हैं कि शेयर बाजार में फंडामेंटल एनालिसिस (Fundamental Analysis) के अंतर्गत शेयर बाज़ार में ROE क्या होता है? ROE किस प्रकार काम करता है?
ROE का पूरा नाम क्या है?
ROE का पूरा नाम है (Return on Equity / इक्विटी पर लाभ)।
शेयर बाज़ार में ROE क्या होता है?
दोस्तों, ROE का मतलब होता है (Return on Equity), जो कि एक वित्तीय लाभप्रदता अनुपात है। यह एक ऐसा अनुपात है जो हमें बताता है कि एक कंपनी अपने Shareholders को उनके द्वारा निवेश किए गए पैसों पर एक वित्तीय वर्ष में कितना लाभ कमा रही है। इसे हम ROE यानी Return on Equity कहते हैं।
अगर किसी कंपनी का ROE (Return on Equity) 25 प्रतिशत है, तो इसका अर्थ है कि उस कंपनी ने अपने Shareholders को उनके द्वारा निवेश किए गए पैसों पर एक वित्तीय वर्ष में 25 प्रतिशत का लाभ दिया है। अर्थात, Return on Equity यह दर्शाता है कि एक कंपनी अपने Shareholders के निवेश पर लाभ कामाने में कितनी सक्षम है।
दूसरे शब्दों में, Return on Equity वह वित्तीय अनुपात है, जिससे हम जान सकते हैं कि एक कंपनी हमें अपनी निवेश पर अपने एक वित्तीय वर्ष में कितना लाभ दे रही है। इसे संक्षेप में ROE या (Return on Equity) कहा जाता है।
उदाहरण के लिए: मान लीजिए कि आपने किसी ABC Limited कंपनी में 100 रुपये निवेश किए हैं और एक साल बाद वह 100 रुपये बढ़कर 120 रुपये हो जाते हैं। इसका मतलब है कि उस ABC Limited कंपनी ने आपको अपनी निवेश पर 20% का लाभ दिया है, जिसे हम संक्षेप में ROE या (Return on Equity) कहते हैं।
हम ROE को कैसे (कैलकुलेट) माप सकते हैं?
दोस्तों, किसी कंपनी का ROE (Return on Equity) निकालने के लिए हमें उस कंपनी के Net Profit को उसकी Total Shareholders Equity से भाग देना होता है।
दोस्तों, Net Profit से तात्पर्य है एक कंपनी का शुद्ध लाभ, यानी कि जितना एक कंपनी एक Financial Year में लाभ कमाती है, उसमें से सभी खर्चे, ब्याज और कर आदि निकालने के बाद जो राशि बचती है, वही कंपनी का Net Profit है।
Shareholders Equity का मतलब उस रकम से है जो निवेशकों ने शेयरों के बदले कंपनी में निवेश किया है।
अब हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं कि किसी कंपनी का ROE (Return on Equity) कैसे निकाला जा सकता है।
मान लीजिए, एक कंपनी का नाम ABC Limited है, जिसकी Total Shareholders Equity 100 करोड़ रुपये है।
और मान लीजिए कि उस कंपनी का Net Profit 25 करोड़ रुपये है।
तो, ABC Limited का ROE (Return on Equity) होगा:
ROE = Net Profit / Total Shareholders Equity * 100
= 25 करोड़ / 100 करोड़ * 100 = 25%
इसलिए, दोस्तों, ABC Limited का ROE (Return on Equity) 25% है, जिसका अर्थ है कि ABC Limited ने अपने सभी Shareholders को उनकी निवेशित राशि पर एक Financial Year में 25 प्रतिशत का Return प्रदान किया
ROE के कितने प्रकार होते हैं?
दोस्तों, ROE (Return on Equity) आमतौर पर दो प्रकार का होता है:
- Return On Total Equity
- Return On Common Equity
1: Return On Total Equity
का अर्थ है एक कंपनी की कुल Shareholder Equity पर मिलने वाले Returns. Return On Total Equity की गणना के लिए, हमें कंपनी के Net Profit को उसकी Total Shareholder Equity से विभाजित करना होता है।
2: Return On Common Equity
किसी कंपनी की Total Shareholder Equity में से Preferred Equity को घटाने के बाद जो राशि बचती है, उसे हम Common Equity कहते हैं। Return On Common Equity की गणना करने के लिए, हमें कंपनी के Net Profit में से Preferred Dividends घटाकर, उसे Common Shareholders Equity से विभाजित करना चाहिए।
इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं।
मान लीजिए कि XYZ Limited नाम की एक कंपनी है, जिसकी Total Shareholders Equity 200 करोड़ रुपये है और उसका Net Profit 55 करोड़ रुपये है। Preferred Shareholders Equity 70 करोड़ रुपये है, जिस पर 10% Return हर साल XYZ Limited को अपने Preferred Shareholders को Dividends के रूप में देना होता है।
तो XYZ Limited का Return On Common Equity होगा:
Return On Common Equity = (Net Profit – Preferred Dividends) / Common Equity
= (55 करोड़ – (0.10 * 70 करोड़)) / 130 करोड़
= (48 करोड़ / 130 करोड़) * 100
= 36.92 %
इस प्रकार, XYZ Limited का Return On Common Equity 36.92 प्रतिशत होगा।
ROE हमें किसी कंपनी के बारे में क्या जानकारी देता है?

1: ROE हमें यह जानकारी देता है कि एक कंपनी अपने Shareholders को उनके द्वारा Invest किए गए पैसों पर एक वित्तीय वर्ष में कितना लाभ कमा रही है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी का ROE 20% है, तो इसका मतलब है कि उस कंपनी ने अपने Shareholders को उनके निवेश पर 20 प्रतिशत का लाभ दिया है।
2: ROE के माध्यम से, हम एक ही क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों के बीच तुलना करके जान सकते हैं कि कौन सी कंपनी अपने Investors को उनके निवेश पर अधिक लाभ प्रदान कर रही है।
3: यदि किसी कंपनी का ROE उच्च है और हर साल बढ़ रहा है, तो हम यह कह सकते हैं कि वह निवेश के लिए एक अच्छी कंपनी है। वहीं, यदि ROE कम है और हर साल घटता जा रहा है, तो यह संकेत करता है कि वह कंपनी निवेश के लिए अच्छी नहीं है।
4: एक कंपनी के ROE (Return on Equity) से हमें उसके प्रबंधन के बारे में भी जानकारी मिलती है। अगर ROE उच्च है और लगातार बढ़ रहा है, तो हम कह सकते हैं कि प्रबंधन अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए सही निर्णय ले रहा है और Shareholders के फंड का सही इस्तेमाल कर रहा है। दूसरी ओर, यदि ROE कम है और घटता जा रहा है, तो यह बताता है कि प्रबंधन अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए सही निर्णय नहीं ले पा रहा है और Shareholders के फंड का भी प्रभावी उपयोग नहीं कर रहा
5: ROE (Return on Equity) हमें एक कंपनी की वृद्धि का मूल्यांकन करने में सहायक होता है। इसका मतलब है कि यदि किसी कंपनी का ROE उच्च है और साल दर साल बढ़ता जा रहा है, तो हम कह सकते हैं कि वह कंपनी अपने व्यवसाय से अच्छा लाभ कमा रही है और लगातार एक सकारात्मक अनुपात में बढ़ रही है। वहीं, यदि किसी कंपनी का ROE निम्न है और हर साल कम होता जा रहा है, तो हम कह सकते हैं कि वह कंपनी अपने व्यवसाय से पर्याप्त लाभ नहीं कमा रही है, जिससे उसकी वृद्धि भी कम होती जा रही है। इसी तरह, यदि किसी कंपनी का ROE नकारात्मक है और वह साल दर साल बढ़ रहा है, तो इसका अर्थ है कि वह एक हानि में चल रही कंपनी है, जिसकी वृद्धि नकारात्मक दिशा में है।
6: ROE (Return on Equity) हमें एक कंपनी की स्थिरता का भी संकेत देता है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी कंपनी का ROE उच्च है और हर साल एक निश्चित अनुपात में बढ़ रहा है, तो हम कह सकते हैं कि वह कंपनी एक अच्छी और स्थिर कंपनी है। परंतु, यदि किसी कंपनी का ROE हर साल बहुत अधिक अनुपात में उतार-चढ़ाव कर रहा है, तो हम कह सकते हैं कि वह कंपनी स्थिर नहीं है।
7: ROE (Return on Equity) से हमें किसी कम्पनी की शेयर प्राइस और डिविडेंड की वृद्धि के बारे में जानकारी मिलती है। यदि किसी कम्पनी का ROE उच्च है और लगातार बढ़ रहा है, तो इसका मतलब यह है कि वह कम्पनी अपने व्यवसाय से अच्छे लाभ कमा रही है और अपने निवेशकों को उनके निवेश पर वर्ष दर वर्ष अच्छा रिटर्न दे रही है। जब कोई कम्पनी अपने व्यवसाय से अच्छे लाभ प्राप्त करती है और अपने शेयर धारकों को संतोषजनक रिटर्न देती है, तो बहुत से लोग उसमें निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे कम्पनी की शेयर प्राइस बढ़ने लगती है। दूसरी ओर, यदि किसी कम्पनी का ROE कम है और लगातार घट रहा है, तो यह संकेत करता है कि वह अपने व्यवसाय से अच्छे लाभ नहीं कमा पा रही है और ना ही अपने शेयर धारकों को उचित रिटर्न दे रही है। ऐसे में लोग उस कम्पनी में निवेश करने से कतराते हैं, जिससे शेयर प्राइस भी गिरने लगती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादातर उच्च लाभ वाली कम्पनियाँ अपने शेयरधारकों को लाभ का एक हिस्सा डिविडेंड के रूप में वितरित कर पाती हैं, जबकि निम्न लाभ या नकारात्मक ROE वाली कम्पनियों के लिए यह कार्य करना कठिन होता।
ROE की क्या सीमाएँ हैं?
1: ROE के आधार पर हम किसी भी नुकसान में चल रही कंपनी का मूल्यांकन नहीं कर सकते। अगर किसी कंपनी का ROE नकारात्मक है, तो हम उसे इस मापदंड से नहीं आंक सकते और न ही उसे उस क्षेत्र के अन्य लाभप्रद कंपनियों, यानी सकारात्मक ROE वाली कंपनियों के साथ तुलना कर सकते हैं। ऐसी नुकसान में चल रही कंपनियों या नकारात्मक ROE वाली कंपनियों का विश्लेषण करने के लिए हमें उनके अन्य कारकों पर ध्यान देना आवश्यक है।
2: जब देश की अर्थव्यवस्था संकट में होती है, तब भी हम किसी कंपनी का मूल्यांकन ROE के आधार पर नहीं कर सकते। इस समय अधिकांश कंपनियों का ROE बहुत कम या नकारात्मक हो सकता है, क्योंकि जब अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो किसी भी कंपनी के लिए लगातार लाभ में रहना कठिन हो जाता है।
3: ROE के आधार पर हम विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों की तुलना नहीं कर सकते, क्योंकि इसका उपयोग केवल एक ही क्षेत्र की दो कंपनियों की तुलना के लिए किया जाता है।
4: यदि किसी कंपनी पर अत्यधिक ऋण है, तो ऐसी स्थिति में भी हम उसे ROE के माध्यम से नहीं आंक सकते, क्योंकि अत्यधिक ऋण के कारण किसी कंपनी का ROE काफी बढ़ सकता है।
5: आपको यह जानकर खुशी होगी कि एक कंपनी का ROE उसके प्रबंधन द्वारा विभिन्न तरीकों से प्रभावित किया जा सकता है। इसलिए हमें किसी भी कंपनी में केवल ROE के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए, बल्कि ROE के साथ-साथ उस कंपनी के अन्य कारकों को भी ध्यान में रखना चाहिए और फिर ही अपने पैसे वहां निवेशित करने चाहिए।
ROE को प्रभावित करने वाले कौन से घटक हैं?
एक कंपनी की ROE (Return on Equity) को कई घटक प्रभावित कर सकते हैं, जो कि नीचे दिए गए हैं:
1: Debt
किसी कंपनी पर अत्यधिक Debt उसकी ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकता है। मतलब, यदि किसी कंपनी ने अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए काफी Debt लिया है, तो यह Debt उसकी ROE बढ़ा देता है, जिससे हमें उस कंपनी की वास्तविक स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती। इसलिए निवेश करने से पहले, केवल ROE के आधार पर नहीं, बल्कि अन्य Factors और कंपनी के Debt का भी ध्यान रखना चाहिए।
2: Economy
एक देश की Economy भी वहां की कंपनियों के ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकती है। जब एक देश की Economy मजबूत होती है, तब वहां की अधिकांश कंपनियों का ROE अच्छा होता है। दूसरी ओर, जब Economy कमजोर होती है, तो कंपनियों का ROE भी गिरने लगता है, जिससे यह बहुत कम या यहां तक कि Negative में जा सकता है।
3: Share Buyback
एक कंपनी द्वारा बाजार से अपने Shares का Buyback भी उसके ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकता है। जब कोई कंपनी अपने Shares को वापस खरीदती है, तो उसके Total Outstanding Shares या Total Outstanding Equity की संख्या कम हो जाती है, जिससे ROE (Return on Equity) बढ़ जाता है।
4: Depreciation
अधिक Depreciation भी एक कंपनी के ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ज्यादा Depreciation कंपनी के Net Profit को कम कर देता है, जिससे ROE भी घट जाता है।
5: Capitalization Policy
कंपनी के Management द्वारा किताबों में Market Capitalization को कम या अधिक दिखाकर भी ROE (Return on Equity) को प्रभावित किया जा सकता है।
6: Dividends And Profits
एक कंपनी जब अपने Shareholders को उच्च Dividends देती है या अपने लाभ को Cash के रूप में उपयोग नहीं करती, तो यह भी ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकता है।
7: High Growth companies
वे कंपनियां जो बाजार में तेजी से विकास कर रही हैं, उन्हें अधिक Capital (पूंजी) की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप उनका ROE (Return on Equity) प्रभावित हो सकता है और कम दिखाई दे सकता है।
8: Negative ROCE
किसी कंपनी का Negative ROCE (Return On Capital Employed) भी उसकी ROE (Return on Equity) को प्रभावित कर सकता है।
ROE और Debt का क्या संबंध होता है?

दोस्तों, जैसा कि हमने पहले चर्चा की थी, अधिक Debt किसी कंपनी के Leverage Factors को बढ़ा देता है, जिससे मिलने वाला ROE (Return on Equity) भ्रमित कर सकता है और हमें उस कंपनी की वास्तविक स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं देता है।
आइए इसे एक उदाहरण के द्वारा समझने का प्रयास करते हैं।
मान लीजिए कि ABC Limited और XYZ Limited नाम की दो कंपनियाँ हैं, जिनका Net Profit, Debt और Shareholders Equity इस प्रकार है, जैसा कि आप नीचे दिए गए चार्ट में देख सकते हैं।
Financial data | ABC Limited (Debt) | XYZ Limited (No Debt) |
EBIT (Earnings Before Interest Taxes) | 2000 | 2000 |
Interest 10% | 500 | 0 |
PBT (Profit Before Tax) | 1500 | 2000 |
Tax 10% | 150 | 200 |
PAT (Profit After Tax) | 1350 | 1800 |
Shareholders Capital | 4000 | 9000 |
Debt | 5000 | 0 |
Reserves | 0 | 0 |
Net Profit | 1350 | 1800 |
Net worth (Sh. Equity) | 9000 | 9000 |
दोस्तों, ऊपर दिए गए Financial Data के आधार पर ABC Limited और XYZ Limited की ROE (Return on Equity) का आंकलन किया जा सकता है।
ROE = Net Profit / Total Shareholders Equity * 100
ABC Limited की ROE (Return on Equity) यह होगी:
ROE = 1350 / 4000 * 100 = 33.75 %
वहीं, XYZ Limited की ROE (Return on Equity) होती है:
ROE = 1800 / 9000 * 100 = 20 %
इस प्रकार, यदि हम केवल ROE को देखें, तो ABC Limited का ROE XYZ Limited से अधिक है, जिससे यह प्रतीत होता है कि ABC Limited एक बेहतर कंपनी है। लेकिन क्या यह सच में ऐसा है?
XYZ Limited की ROE 20% है, और इस पर कोई Debt नहीं है। जबकि ABC Limited की ROE 33.75% है, लेकिन उसने 4000 रुपये की Equity पर 5000 रुपये का Debt लिया हुआ है, जो भविष्य में समस्याएँ पैदा कर सकता है।
इसलिए, ABC Limited का ROE 33.75% होने के बावजूद, वह Financial तौर पर कमजोर है। वहीं, XYZ Limited का ROE 20% होने के बावजूद, वह ABC Limited की तुलना में Financial रूप से अधिक मजबूत है।
दोस्तों, ऊपर दिए गए ABC Limited और XYZ Limited के उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि कैसे Debt एक कंपनी के ROE (Return on Equity) को बढ़ा सकता है, जिससे हमें सही जानकारी नहीं मिल पाती। इसलिए, हमें किसी भी कंपनी को केवल ROE के आधार पर नहीं आंकना चाहिए और यह देखना चाहिए कि कंपनी पर कितनी Debt है, ताकि हमें यह न लगे कि वह अपने ROE (Return on Equity) को बढ़ाने के लिए भारी Debt का सहारा ले रही
किस प्रतिशत ROE को एक अच्छी कंपनी मानते हैं?
दोस्तों, एक अच्छे कंपनी का ROE (Return on Equity) कितना होता है, यह कहीं स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि यदि किसी कंपनी का ROE इतने प्रतिशत पर है, तभी वह अच्छी कंपनी कहलाएगी। लेकिन आमतौर पर बड़े निवेशक यह मानते हैं कि एक अच्छी कंपनी का ROE कम से कम 15% होना चाहिए। यदि हम किसी कंपनी में लंबे समय तक निवेश करने की सोच रहे हैं, तो हमें ऐसी कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनका ROE लगातार 15% या उससे अधिक रहा है।
हमें केवल वर्तमान वर्ष के ROE पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि पिछले कई वर्षों के ROE (Return on Equity) को भी देखना चाहिए यह जांचने के लिए कि कंपनी ने अपने शेयरधारकों को पहले भी 15% या उससे अधिक रिटर्न दिया है या नहीं। क्योंकि जिन कंपनियों का ROE हर साल 15% या उससे अधिक रहा है, उन कंपनियों के अच्छे और सफल बनने की संभावनाएँ अधिक होती हैं।
हालांकि, जैसा कि हमने पहले चर्चा की, केवल ROE का अधिक होना जरूरी नहीं है कि कंपनी भविष्य में भी अच्छी साबित होगी।एक कंपनी के ROE (Return on Equity) के साथ-साथ हमें उसकी अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
हम किसी भी कंपनी का ROE कैसे जांच सकते हैं?
दोस्तों, हम Investing.com, Moneycontrol.com, Ticker – Finology.in और Upstox.com जैसी वेबसाइटों का उपयोग करके किसी भी कंपनी का ROE (Return on Equity) चेक कर सकते हैं। नीचे Upstox.com वेबसाइट पर किसी कंपनी का ROE कैसे चेक करें, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
इसके लिए आपको बस Google पर Upstox.com सर्च करना है और उस साइट को खोलना है।

Upstox.com साइट खुलने के बाद, आपको जिस कंपनी का ROE चेक करना है, उसका नाम यहां दर्ज करना है और सर्च करना है।

कंपनी का नाम सर्च करने के बाद, क्लीक कर के उस कंपनी का पेज खुलेगा। वहां आप को “Fundamental” में क्लिक कर के उस कंपनी का ROE देख सकते हैं।

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Conclusion:
- ROE (Return on Equity) से हमें कम्पनी की विकास दर भी स्पष्ट होती है, यह बताता है कि कम्पनी कितने अच्छे अनुपात से बढ़ रही है।
- यदि बिना या कम कर्ज वाली किसी कम्पनी का ROE (Return on Equity) हर साल एक संतोषजनक अनुपात में बढ़ रहा है, तो ऐसी कम्पनी को हम अच्छी मान सकते हैं।
- हालांकि, दोस्तों, हम केवल ROE (Return on Equity) के आधार पर किसी भी कम्पनी में निवेश नहीं कर सकते; अन्य महत्वपूर्ण कारकों का भी ध्यान रखना जरूरी है।
- ROE (Return on Equity) से यह भी ज्ञात होता है कि कम्पनी अपने शेयरधारकों के फंड का कितना कुशलता से उपयोग कर रही है। यदि कोई कम्पनी अपने शेयरधारकों के फंड पर अच्छा मुनाफा कमा रही है, तो यह दर्शाता है कि वह अपने फंड का सही प्रयोग कर रही है, वहीं यदि नहीं, तो इसका मतलब है कि वह उचित तरीके से उपयोग नहीं कर रही।
- किसी कम्पनी का ROE (Return on Equity) निकालने का सूत्र है ROE = Net Profit / Total Shareholders Equity * 100, और Return On Common Equity के लिए सूत्र है Return On Common Equity = (Net Profit – Preferred Dividends) / Common Equity।
- यदि किसी कम्पनी का ROE (Return on Equity) कम या नकारात्मक है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कम्पनी खराब है; वह एक अस्थायी समस्या में भी हो सकती है, जिससे उसका ROE कम या नकारात्मक दिखाई दे रहा हो। भविष्य में वह समस्या दूर कर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, इसलिए किसी कम्पनी का मूल्यांकन केवल उसके ROE (Return on Equity) से नहीं करना चाहिए।
- किसी कम्पनी द्वारा शेयरधारकों की मर्जी को कम करके और कर्ज बढ़ाकर भी ROE को बढ़ाया जा सकता है।
- ROE (Return on Equity) हमें कम्पनी की लाभप्रदता के बारे में भी जानकारी देता है। जिन कम्पनीज का ROE अधिक होता है, उन्हें निवेश के दृष्टिकोण से अच्छा माना जाता है, जबकि जिनका ROE कम है, उन्हें खराब कहा जा सकता है।
- अलग-अलग क्षेत्रों की कम्पनीज के बीच ROE (Return on Equity) के आधार पर तुलना उचित नहीं होती।
- एक कम्पनी के पिछले 5 से 10 वर्षों के ROE (Return on Equity) को देख कर और उसे अपने क्षेत्र के ROE और अन्य कम्पनीज के ROE से तुलना करके हम उसके बारे में सही तरीके से मूल्यांकन कर सकते हैं।
- किसी कम्पनी द्वारा उच्च डिविडेंड देकर भी ROE (Return on Equity) को बढ़ाया जा सकता है; इसलिए किसी भी उच्च ROE वाली कम्पनी में निवेश करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि कहीं वह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड दे कर अपने ROE (Return on Equity) को बढ़ा तो नहीं रही है।
- आपको स्टॉक मार्केट में अच्छे लाभ के लिए ऐसे व्यापारों में निवेश करना चाहिए, जो आर्थिक रूप से मजबूत हों और हर साल अपना मुनाफा बढ़ाती हों। इस कार्य में ROE (Return on Equity) आपकी मदद कर सकता
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Conclusion:
आपको इस पोस्टमैं शेयर बाज़ार में ROE क्या होता है? ROE किस प्रकार काम करता है? (Share Bazar mein ROE kya hota hai?) समझ आया होगा। अगर आप भी शेयर बाज़ार में शेयर मैं इन्वेस्ट कर के पैसा कमाना चाहते हैं तो इस पोस्ट में बताए गए तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।